Tuesday, 4 June 2013

गरीबी की परिभाषा





गरीब तो विकास करते समाज के
खूबसूरत चेहरे पर काले तिल की तरह है
जो असमानता को सौंदर्य प्रदान करता है;

गरीबी तो राजनीति से उपजी कीचड़ है
जैसे प्रकृति कीचड में कमल खिलाती है
वैसे ही सत्ता इस गरीबी के कीचड़ में
उपनिवेश के सुन्दर नयनाभिराम कमल खिलाती है;

गरीब तो स्वर्ग की नृत्य करती
अप्सराओं की तरह है
जो दिल्लिओं में सजे दरबारों में
बिराजमान इन्द्रों के समक्ष
मृत्यु का नृत्य करने के लिए नियुक्त हैं;

राजनीतिक अर्थव्यवस्था में गरीब
रेगिस्तान में दिखाई देने वाली
मृग मरीचिका की तरह है,
जो पैदा होती है
होने का भ्रम उत्पन्न करती है
और अपने आप विलीन हो जाती है,
भ्रमों में पड़ कर
कोई नीति नहीं बनायी जाना चाहिए;

वक्त बदला है आप बस इतनी बदल जाईये
अब गरीब को आप सीधे गुलाम मत बनाइये,
वह अब साक्षर है, गुलामी बनाए रखने के लिए
उसे सहभागी और हितग्राही के रास्ते से
अपने पिंजरे की तरफ बुलाईये,

उदारवादी सफेदी पसंद समाज के लिए
गरीब उस अनिवार्य तिलचट्टे की तरह है,
जिसका होना अनादी अनंत है,
ताकि वह उनका मल खाता रहे
एक बुनियादी मूल्य की तरह,

विद्वानों के लिए गरीबी
विचार सौष्ठव का उपकरण है,
सिद्धांत के साथ गरीबी पर झूठ की
एक और परत चढ़ाना
उनकी उपलब्धि बन जाती है,

गरीबों को भी पता है वे पेशा हैं
और बसा हुआ है बाज़ार उनके चित्रों का
गांव से लेकर धरती के आखिरी कोने तक,

सरकारों के लिए जरूरी है
गरीबी का बने रहना
ताकि चुनाव लड़े जा सकें
उपनिवेशवादी लोकतंत्र
गरीबों को खाकर जिन्दा रहता है;

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