भारत सरकार को एक बात समझ आई कि गरीबी की रेखा और गरीबी की रेखा एक धोखा और झूठ है. माओवाद से प्रभावित जिलों में ४० लाख परिवार गरीबी की रेखा में घोषित किये जा रहे हैं. देखिये इसे -
१. देश के २२ जिले (ग्रामीण) बी पी एल घोषित किये जा रहे हैं;
२. माओवाद प्रभावित ३४ अन्य जिलों में सभी दलित-आदिवासी, महिला नेतृत्व वाले और वृद्धजनों वाले परिवार गरीबी की रेखा में होंगे;
३. २६ अन्य जिलों के १०६ विकास खण्डों के सभी दलित-आदिवासी, महिला नेतृत्व वाले और वृद्धजनों वाले परिवार गरीबी की रेखा में होंगे;
१६ साल हो गए हमें यह चिल्लाते-चिल्लाते की गरीबी की रेखा एक षड़यंत्र है, देश के संगठनों और संस्थाओं ने रोज़ी-रोटी अधिकार अभियान के तहत सर्वोच्च न्यायालय और अन्य न्यायालयों में हज़ारों शपथ पत्र दिए, दिल्ली और अन्य जगहों पर लोकतांत्रिक ढंग से अहिंसक धरने दिए; १००० से ज्यादा अध्ययन हुए और शोध पत्र लिखे गए; हमारी सरकार ने न मानी; माओवादियों की मान ली; क्या अब भी आप यह नहीं मानते के हमारी सरकार सीधे सीधे नहीं मानती; वह सम्मान की भाषा नहीं समझती और वह चाहती है कि लोग बागी हो जाए;