शब्द
शब्द पैरों में ताकत भर सकते हैं, शब्द आँखों में रौशनी भर सकते हैं,
शब्द ज़ुल्म के खिलाफ जंग का ऐलान कर सकते हैं,
शब्द कुछ और न सही, जिन्दगी का मुकाम बन सकते हैं,
शब्द तलवारों के ज्यादा नुकीले होते हैं,
बारूदी सरहदों के बीच बँटी दुनिया में
शब्द ही इंसानियत का पैगाम बन सकते है,
शब्द तीर की धार बन सकते हैं,
शब्द लड़ाई का हथियार बन सकते हैं
शब्द सितार की तान बन सकते हैं,
शब्द निर्जीव की जान बन सकते हैं
छीन लिया गया जिनका खुदा शब्द उनकी अज़ान बन सकते हैं,
शब्द जब जुड़ जाते हैं पंखुड़ियों की तरह,
कविता बन सकते हैं, कलाम बन सकते हैं;;
सचिन कुमार जैन
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