Saturday, 21 July 2012

लूट का यह तरीका नीतिसम्मत तरीका



भारत सरकार ने पिछले सात सालों में कुल मिलकर 29 लाख 14 हज़ार 4 सौ 13 करोड़ रूपए के करों और शुल्कों में माफ़ देकर अपने खजाने को एक ख़ास वर्ग के लाभ के लिए लुटाया है। 

उनके पास राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा क़ानून के लिए 1 लाख करोड़ रूपए का सालाना बजट नहीं है, पर हर साल औसतम 4 लाख करोड़ रूपए की करों में छूट और रियायत बडे समूहों और उद्योगों के दी जाती रही। 

क्या आप विश्वास करेंगे कि हीरे-जवाहरात वालों को 2 लाख 41 हज़ार और 1 करोड़ रूपए की छूट दी गयी है। 

हमारी अर्थव्यवस्था को खतरे में डालने का काम सरकार-कारपोरेट और अनर्थशास्त्रियों के गठजोड़ ने मिल कर किया है। 

अब उनके धतकरम खुल रहे हैं तो टाइम पत्रिका को भी मिर्ची लग रही है, अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी और मोंटेक सिंह जी जैसे लोग अपराधबोध से ग्रस्त होते जा रहे हैं क्यूंकि वे लूट के काम को और गति नहीं दे पा रहे हैं।
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ये हैं आंकडे, सरकार के ही हैं!
This is the amount of revenues Indian Government has waived off - Revenues Forgone (in Crores)
Year Total Taxes Foregone Reveues forgone for SEZ Revenues forgone in favor of Diamond and Precious Stone sector
2005-06 244290 1070 16934
2006-07 288959 2146 22168
2007-08 341317 1804 25583
2008-09 458516 2324 27649
2009-10 540269 3987 42440
2010-11 511630 8330.16 49164
2011-12 529432 5313.6 57063
       
Total in 7 Years  2914413 24974.76 241001
Source - Budget Document for the respective years titled a Revenues Forgone 

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