Sunday, 29 July 2012

बात क्या वही है



बात क्या वही है 
जो तुमने कही और मैने सुनी 
या बात में कोई बुनियादी फर्क है,
शायद बात वही नहीं है
कहानी उघड़ी सी नहीं है
कुछ बात छिपी सी है,
तुम कहते हो कोई बात नहीं, 
ये तो बस एक तर्क है 
हमारी एक बात यह भी है 
हम बंदूकों पर ही नहीं
बातों पर भी सतर्क हैं
सच्चाई तो यही है 
झूठी बातों की नींव पर खड़ा ये
मैं कहता हूँ ये तो नर्क है 
तुम इसे लोकतंत्र कहते हो
बात में बस इतना ही तो फर्क है;;


सचिन कुमार जैन 

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